भारत की टाटा मोटर्स ने यूरोप की बड़ी ट्रक और बस कंपनी Iveco Group पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। टाटा मोटर्स और Iveco ने शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 की शाम संयुक्त रूप से बताया कि टेंडर ऑफर का शुरुआती सेटलमेंट पूरा हो गया है और टाटा मोटर्स के पास अब Iveco की करीब 89.42% हिस्सेदारी है। इसके साथ ही इटली की यह कंपनी टाटा मोटर्स की अप्रत्यक्ष सब्सिडियरी बन गई है। टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को Iveco का चेयरपर्सन बनाया गया है। यह सौदा टाटा के इतिहास के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहणों में गिना जा रहा है।
सौदे की मुख्य बातें
- टाटा मोटर्स ने Iveco के 23,81,57,212 (238.16 मिलियन) कॉमन शेयर खरीदे, जो ट्रेजरी शेयर घटाकर कंपनी की कॉमन शेयर पूंजी का लगभग 89.42% हैं।
- हर शेयर के लिए 14.40 यूरो नकद दिए गए (डिविडेंड सहित)। इस हिसाब से इन शेयरों की कुल कीमत करीब 3.43 अरब यूरो बैठती है।
- ऑफर टाटा मोटर्स की इकाई TML CV Holdings Pte. Ltd. ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी TML CV Holdings B.V. के जरिए दिया था।
- जो शेयरधारक अब तक शेयर नहीं दे पाए, उनके लिए ऑफर 2 से 6 नवंबर 2026 तक पांच ट्रेडिंग दिनों के लिए दोबारा खुलेगा। इस दौरान दिए गए शेयरों का सेटलमेंट 13 नवंबर 2026 को होगा।
(स्रोत: Tata Motors और Iveco Group की संयुक्त घोषणा, The Hindu, Autocar Professional, Times of India)
Iveco के बोर्ड में क्या बदला
अधिग्रहण के बाद Iveco का बोर्ड और गवर्नेंस ढांचा बदल दिया गया है। एन. चंद्रशेखरन नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चेयरपर्सन बने हैं। ओलोफ पर्सन पहले की तरह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO बने रहेंगे, यानी रोजमर्रा का कामकाज मौजूदा मैनेजमेंट के हाथ में ही रहेगा। जगुआर लैंड रोवर के CEO पी.बी. बालाजी और टाटा मोटर्स के MD व CEO गिरीश वाघ को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया है। Guenter Butschek और Charles Nichols स्वतंत्र निदेशक के रूप में बोर्ड में आए हैं। कंपनी के सभी बकाया स्पेशल वोटिंग शेयर बिना किसी भुगतान के वापस खरीद लिए गए, इसलिए अब कोई स्पेशल वोटिंग शेयर बाकी नहीं है।
यह सौदा कहां से शुरू हुआ: पूरा बैकग्राउंड
टाटा मोटर्स और Iveco ने इस सौदे का ऐलान 30 जुलाई 2025 को किया था। तब टाटा मोटर्स ने Iveco के सभी कॉमन शेयरों के लिए पूरी तरह नकद टेंडर ऑफर की घोषणा की थी। उस वक्त ऑफर कीमत 14.10 यूरो प्रति शेयर बताई गई थी और पूरे सौदे की कीमत लगभग 3.8 अरब यूरो आंकी गई थी। Reuters के मुताबिक Iveco की सबसे बड़ी शेयरधारक Exor (अग्नेली परिवार की होल्डिंग कंपनी) ने अपनी करीब 27% नियंत्रक हिस्सेदारी टाटा को देने पर सहमति दी थी, और Iveco के बोर्ड ने भी शेयरधारकों से ऑफर स्वीकार करने की सिफारिश की थी।
सौदे की सबसे अहम शर्त यह थी कि Iveco पहले अपना डिफेंस कारोबार (IDV और ASTRA ब्रांड) अलग करेगी। यह कारोबार इटली की डिफेंस कंपनी Leonardo को 1.7 अरब यूरो के एंटरप्राइज वैल्यू पर बेचा गया, और Iveco के मुताबिक इसका पूरा स्वामित्व मार्च 2026 में Leonardo को ट्रांसफर हो गया। यानी टाटा मोटर्स ने डिफेंस हिस्से को छोड़कर Iveco का ट्रक, बस और पावरट्रेन कारोबार खरीदा है।
टाटा के लिए यह इतना बड़ा कदम क्यों है
टाटा ग्रुप पहले भी बड़े विदेशी अधिग्रहण कर चुका है, जैसे Tetley (चाय), Corus (स्टील) और Jaguar Land Rover (लग्जरी कार)। वे सौदे रतन टाटा के दौर में हुए थे। The Hindu के मुताबिक Iveco का अधिग्रहण चंद्रशेखरन के नेतृत्व में उसी कड़ी का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे ग्रुप की वैश्विक मौजूदगी बढ़ेगी।
टाटा मोटर्स भारत में ट्रकों और बसों की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, जबकि Iveco की मजबूत पकड़ यूरोप और लैटिन अमेरिका में है। दोनों कंपनियों ने 2025 की घोषणा में कहा था कि उनके प्रोडक्ट और बाजार एक-दूसरे के पूरक हैं, यानी जहां एक कमजोर है वहां दूसरी मजबूत है। मिलकर ये कमर्शियल वाहनों की एक बड़ी वैश्विक कंपनी बनाना चाहती हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा
निवेशकों के लिए: इतना बड़ा अधिग्रहण कंपनी की बैलेंस शीट, कर्ज और आने वाले तिमाही नतीजों पर असर डाल सकता है। अब Iveco के नतीजे टाटा मोटर्स के कंसॉलिडेटेड आंकड़ों में जुड़ेंगे। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी सौदे की फंडिंग कैसे करती है और दोनों कंपनियों के मिलने से लागत में बचत (सिनर्जी) कितनी जल्दी दिखती है। यह खबर निवेश सलाह नहीं है; कोई भी फैसला अपने वित्तीय सलाहकार से बात करके ही लें।
ग्राहकों और उद्योग के लिए: लंबे समय में भारतीय ग्राहकों को बेहतर तकनीक वाले ट्रक और बसें मिल सकती हैं, खासकर इलेक्ट्रिक, गैस और हाइड्रोजन जैसी साफ ईंधन तकनीक में, जिन पर यूरोपीय कंपनियां काफी काम कर रही हैं। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि भारतीय कंपनियां अब विदेशी ब्रांड खरीदकर दुनिया भर के बाजारों में मुकाबला कर रही हैं।
आगे क्या
- 2 से 6 नवंबर 2026: बाकी शेयरधारकों के लिए ऑफर दोबारा खुलेगा।
- 13 नवंबर 2026: इस अवधि में दिए गए शेयरों का अंतिम सेटलमेंट।
- इसके बाद टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी 89.42% से और बढ़ सकती है। कंपनी आगे का रास्ता, जैसे शेयर बाजार से डीलिस्टिंग, किस तरह तय करती है, इस पर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
कुल मिलाकर, करीब सवा साल चली प्रक्रिया के बाद Iveco अब औपचारिक रूप से टाटा परिवार का हिस्सा बन गई है। असली परीक्षा अब इस बात की होगी कि दोनों कंपनियों का मेल कितनी तेजी से मुनाफे और बेहतर प्रोडक्ट में बदलता है।

