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6 नवम्बर 2026, शुक्र

Yes Bank शेयर ~10% टूटा: सुप्रीम कोर्ट ने ₹8,415 करोड़ AT-1 बॉन्ड राइट-ऑफ रद्द रखने का फैसला बरकरार रखा

मुंबई का BSE—बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भवन—Yes Bank शेयर और AT-1 बॉन्ड फैसले की खबर

शेयर बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को Yes Bank शेयर धड़ाम हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें बैंक के 2020 के पुनर्गठन के दौरान किए गए ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द कर दिया गया था। Economic Times और LiveMint के मुताबिक कोर्ट ने साफ कहा कि बैंक को इन बॉन्ड को उनकी निर्धारित कूपन दरों—लगभग 9% और 9.5%—के हिसाब से मानना होगा।

LiveMint के अनुसार NSE पर शेयर कुछ ही मिनटों में करीब ₹21.25 से ₹19.08 तक फिसला—यानी करीब 10% की गिरावट। अलग-अलग रिपोर्ट्स में इंट्राडे गिरावट 10% से 15% तक बताई गई है, इसलिए दिन का अंतिम बंद भाव बाजार बंद होने के बाद ही तय होगा। CNBC-TV18 ने इसे जुलाई 2020 के बाद शेयर की सबसे तेज एक-दिवसीय गिरावटों में गिना।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

LiveMint के अनुसार जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई आधार नहीं पाया और अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने देखा कि क्या बैंक के एडमिनिस्ट्रेटर के पास पुनर्निर्माण योजना में स्पष्ट प्रावधान के बिना बॉन्ड राइट-ऑफ करने का अधिकार था, और क्या यह RBI के मास्टर सर्कुलर व बॉन्ड की शर्तों के अनुरूप था।

बेंच का स्पष्ट निर्देश रहा कि वार्षिक कूपन का भुगतान इन अपीलों के नतीजे से प्रभावित नहीं होगा और Information Memorandum के मुताबिक किया जाना चाहिए। Economic Times के अनुसार हाईकोर्ट का फैसला जनवरी 2023 का था; Yes Bank, RBI और केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

AT-1 बॉन्ड और 2020 का संकट—संक्षेप में

  • कब जारी हुए: CNBC-TV18 के मुताबिक Yes Bank ने 2016–17 में करीब ₹8,415 करोड़ के ये AT-1 बॉन्ड जुटाए थे।
  • क्या हैं AT-1: Basel-III के तहत ये हाइब्रिड पूंजी उपकरण हैं, जो बैंक के गैर-व्यवहार्य (point of non-viability) होने पर नुकसान सोख सकते हैं।
  • 2020 में क्या हुआ: बैंक के बचाव/पुनर्गठन के दौरान एडमिनिस्ट्रेटर ने इन बॉन्ड को जीरो पर राइट-डाउन कर दिया—यानी मूलधन खो गया।
  • हाईकोर्ट: जनवरी 2023 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राइट-ऑफ रद्द किया; सुप्रीम कोर्ट ने अब उसे बरकरार रखा।

राशि के आंकड़े पर ध्यान दें—कुछ हेडलाइन में ‘₹8,400 करोड़’ लिखा है, पर Economic Times, LiveMint और CNBC-TV18 की डिटेल में जारी/राइट-ऑफ रकम ₹8,415 करोड़ बताई गई है। इसी आंकड़े को आधार माना गया है।

जमाकर्ता बनाम बॉन्डधारक—फर्क समझें

यह फैसला बचत खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट वाले ग्राहकों पर सीधा लागू नहीं होता। AT-1 बॉन्ड जमा नहीं, बल्कि जोखिम भरा निवेश उत्पाद हैं। जमा पर DICGC का अलग बीमा ढांचा लागू रहता है; AT-1 में मूलधन और ब्याज दोनों जोखिम में हो सकते हैं। कोर्ट का संदेश बॉन्डधारकों के पक्ष में है—बैंक को कूपन और बॉन्ड की शर्तों का सम्मान करना होगा। शेयरधारकों के लिए खबर अलग है: बाजार ने संभावित देनदारी को नकारात्मक माना, इसलिए शेयर गिरा।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

  • Yes Bank खाताधारक: घबराने की जरूरत नहीं। यह AT-1 विवाद है, सामान्य जमा का नहीं। बैंक RBI नियमन में बना रहता है।
  • पुराने AT-1 बॉन्डधारक: हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट लाइन उनके हक में है; भुगतान की प्रक्रिया और समयसीमा बैंक/ट्रस्टी की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
  • शेयरधारक/नए निवेशक: इंट्राडे 10%+ गिरावट अस्थिरता का संकेत है। केवल हेडलाइन पढ़कर खरीद-बेच न करें; बैंक की पूंजी, मुनाफे और देनदारी के आंकड़े देखें।
  • आम निवेशक सबक: AT-1 जैसे जटिल उत्पादों को ‘ऊंचे ब्याज वाला FD’ समझकर न खरीदें—SEBI ने अतीत में गलत बिक्री के मामलों पर भी कार्रवाई की है।

नोट: यह खबर जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Yes Bank का शेयर आज क्यों गिरा?

सुप्रीम कोर्ट ने ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड राइट-ऑफ को रद्द रखने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट फैसले को सही ठहराया; बाजार ने संभावित देनदारी को नकारात्मक लिया।

कूपन दर कितनी है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक निर्धारित दरें करीब 9% और 9.5% हैं; कोर्ट ने कहा कूपन भुगतान Information Memorandum के अनुसार होना चाहिए।

क्या जमाकर्ताओं का पैसा खतरे में है?

यह फैसला AT-1 बॉन्ड पर है, सामान्य जमा पर नहीं। जमा और AT-1 अलग श्रेणियां हैं।

कौन-सी बेंच ने फैसला सुनाया?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह।

स्रोत: CNBC-TV18, Economic Times, LiveMint, 15 अक्टूबर 2026।

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