केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की शिकायतों पर गौर करने के लिए एक समिति बनाई है। The Hindu के अनुसार संघीय खाद्य मंत्रालय ने मंगलवार 13 अक्टूबर 2026 को पूर्व NITI Aayog सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में पैनल गठित किया। कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर बेहतर रिटर्न की मांग रखी थी।
The Hindu BusinessLine ने भी पुष्टि की कि समिति गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने और चीनी के एक्स-मिल MSP में बढ़ोतरी की मांगों पर सिफारिशें देगी।
समिति में कौन
Hindu के मुताबिक अध्यक्ष रमेश चंद के अलावा सदस्यों में शामिल हैं—कृषि आयुक्त (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय), संयुक्त सचिव (चीनी) खाद्य वितरण विभाग, और संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) उपभोक्ता मामलों का विभाग। BusinessLine कवरेज में निदेशक (चीनी) का भी उल्लेख है; यानी तकनीकी/विभागीय अधिकारी पैनल का हिस्सा हैं।
क्या-क्या जांचा जाएगा
- गन्ने पर बेहतर रिटर्न: खेती की लागत, इनपुट खर्च और संबंधित कारकों को देखते हुए सिफारिशें।
- चीनी का एक्स-मिल MSP: उत्पादन लागत, बाजार प्राप्ति, FRP में बढ़ोतरी और मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता के संदर्भ में संशोधन की मांग।
- रिकवरी टेस्टिंग: चीनी रिकवरी जांच-रिपोर्टिंग की मौजूदा व्यवस्था और पारदर्शी/स्वतंत्र सत्यापन के उपाय।
- तौल (weighment): मिलों पर गन्ना तौल, कैलिब्रेशन, निरीक्षण और सत्यापन तंत्र।
- मशीनी कटाई कटौती: यंत्रीकृत कटाई वाले गन्ने के वजन से कटौती और वास्तविक नुकसान का आकलन; किसान को देय गन्ना मूल्य पर असर।
समिति किसानों, मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से परामर्श करेगी तथा जल्द-से-जल्द रिपोर्ट देगी। कोई सख्त अंतिम तारीख सार्वजनिक आदेश में नहीं बताई गई—BusinessLine ने “at the earliest” वाला फॉर्मूला नोट किया।
MSP संदर्भ—क्यों गरमाया मुद्दा
BusinessLine के अनुसार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) जून 2018 में ₹29/किग्रा तय हुआ था और 2018-19 में ₹31/किग्रा हुआ; उसके बाद संशोधन नहीं हुआ, जबकि गन्ने की FRP समय-समय पर बढ़ी। मिलें MSP बढ़ाने की मांग करती रही हैं; किसान गन्ने के दाम और तौल-रिकवरी विवादों से परेशान हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
- गन्ना किसान: अगर सिफारिशें लागू हुईं तो रिटर्न, तौल पारदर्शिता और मशीनी कटाई कटौती के नियम बदल सकते हैं—रिपोर्ट का इंतजार करें, प्रदर्शन/दावे जारी रखने का फैसला संगठनों पर है।
- चीनी मिलें: एक्स-मिल MSP में बढ़ोतरी की संभावना जांच के दायरे में; लागत-वसूली संतुलन पर असर।
- उपभोक्ता: तत्काल खुदरा चीनी भाव से सीधा जुड़ा आंकड़ा घोषित नहीं; नीति बदलाव बाद में बाजार में दिख सकते हैं।
- राज्य: कर्नाटक-महाराष्ट्र की मांगों से शुरू प्रक्रिया अन्य गन्ना राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रमेश चंद समिति क्यों बनी?
गन्ना किसानों की कीमत/तौल/रिकवरी संबंधी शिकायतों और चीनी क्षेत्र के जुड़े मुद्दों की जांच-सिफारिश के लिए।
अध्यक्ष कौन हैं?
पूर्व NITI Aayog सदस्य प्रो. रमेश चंद।
रिपोर्ट कब तक आएगी?
सरकार ने “जल्द से जल्द” कहा है; सार्वजनिक रूप से कोई निश्चित डेडलाइन नहीं दी गई।
MSP ऑफ शुगर क्या है?
मिल गेट पर चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत; 2018-19 के बाद ₹31/किग्रा पर अटकी बताई जाती है।
किसानों से सलाह होगी?
हां, समिति को किसानों, मिलों, राज्यों और विशेषज्ञों से परामर्श का निर्देश है।
स्रोत: The Hindu, The Hindu BusinessLine, खाद्य मंत्रालय अधिसूचना कवरेज — 14–15 अक्टूबर 2026।

