केंद्र सरकार ने निजी सैटेलाइट टीवी न्यूज चैनलों को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी कर साफ कहा है कि बहस और कार्यक्रमों में सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी रवैये को बढ़ावा न दिया जाए, आतंक-विरोधी ऑपरेशन का लाइव कवरेज न किया जाए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल सिर्फ मददगार के तौर पर हो। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने यह एडवाइजरी बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को जारी की। द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और टेलीग्राफ की रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय ने चैनलों से केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स, 1994 में दिए गए प्रोग्राम कोड का सख्ती से पालन करने को कहा है। गूगल ट्रेंड्स इंडिया पर भी “टीवी” से जुड़ी इस खबर को लेकर सर्च तेजी से बढ़ी है।
एडवाइजरी क्यों जारी हुई
मंत्रालय के मुताबिक केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (संशोधन) नियम, 2021 के तहत बनी अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने पाया कि कई निजी सैटेलाइट चैनलों पर प्रसारित कुछ कार्यक्रम प्रोग्राम कोड की भावना के अनुरूप नहीं थे। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा उद्धृत एडवाइजरी में कहा गया है कि IDC की बैठक में एक जैसे विषयों पर कई चैनलों में मिलती-जुलती खबरें और विजुअल्स देखे गए। इसी आधार पर समिति ने सिफारिश की कि सभी निजी सैटेलाइट चैनलों को वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाए। समिति ने यह भी कहा कि टेलीकास्ट में “अनुचित व्यवहार या भाषा को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए”। मंत्रालय ने किसी खास चैनल या कार्यक्रम का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
एडवाइजरी की मुख्य बातें
- आतंक-विरोधी ऑपरेशन: सुरक्षा बलों के आतंक-विरोधी ऑपरेशन का लाइव कवरेज प्रतिबंधित है। ऑपरेशन खत्म होने तक कवरेज केवल अधिकृत अधिकारी की समय-समय पर दी जाने वाली ब्रीफिंग तक सीमित रहे।
- डिबेट और पैनल चर्चा: लाइव डिबेट समेत कोई भी कार्यक्रम सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी रवैये को बढ़ावा न दे। पैनलिस्टों का सावधानी से चयन हो और जरूरत पड़ने पर अपमानजनक या भड़काऊ बातों को रोकने के लिए म्यूट करना, डिस्क्लेमर देना, फीड रोकना या बंद करना जैसे कदम तुरंत उठाए जाएं।
- हिंसक और विचलित करने वाले विजुअल्स: ऐसे दृश्य दिखाते समय संपादकीय विवेक बरता जाए, उन्हें बार-बार लूप में न चलाया जाए और जहां जरूरी हो, ब्लर या मास्क किया जाए। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़े विजुअल्स में खास सावधानी रखी जाए।
- अपराध रिपोर्टिंग: रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित, संतुलित और जिम्मेदार हो। जानबूझकर झूठ, इशारों में आरोप और आधा सच प्रसारित न किया जाए, न ही गैरकानूनी आचरण का महिमामंडन हो।
- आपदा और हादसे: प्राकृतिक आपदा या बड़े हादसे के पुराने विजुअल्स पर जहां जरूरी हो टाइम-स्टैंप लगाया जाए, ताकि उन्हें लाइव समझकर लोगों में बेवजह घबराहट न फैले।
- भारत का नक्शा: ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुति में सिर्फ सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित प्रामाणिक नक्शे इस्तेमाल हों।
- यौन अपराध पीड़ितों की पहचान: पीड़ित की फोटो, परिवार, मोहल्ला या कोई भी ऐसी सीधी-अप्रत्यक्ष जानकारी न दिखाई जाए जिससे पहचान उजागर हो।
- AI का इस्तेमाल: AI केवल सहायक भूमिका में रहे और खबर की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता से समझौता न हो।
चैनलों को और क्या करना होगा
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार मंत्रालय ने ब्रॉडकास्टर्स से अपने संपादकीय और कंटेंट-रिव्यू सिस्टम को मजबूत करने को कहा है। खबर जुटाने, एडिटिंग, प्रोडक्शन और प्रसारण से जुड़े सभी कर्मचारियों को प्रोग्राम कोड के बारे में जागरूक करने और समय-समय पर वर्कशॉप व ट्रेनिंग सेशन कराने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में दोहराया गया है कि वैधानिक दायित्वों का पालन जरूरी है और प्रोग्राम कोड के किसी भी उल्लंघन पर केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
प्रोग्राम कोड क्या है: आसान भाषा में
प्रोग्राम कोड केबल टीवी नियमों का वह हिस्सा है जो तय करता है कि टीवी पर क्या दिखाया जा सकता है और क्या नहीं। इसमें अश्लीलता, मानहानि, हिंसा भड़काने वाली सामग्री, किसी धर्म या समुदाय पर हमले और देश की एकता-अखंडता के खिलाफ सामग्री जैसे बिंदु शामिल हैं। 2021 के संशोधन नियमों से शिकायतों के निपटारे के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था बनी, जिसमें सबसे ऊपर केंद्र सरकार के स्तर पर अंतर-विभागीय समिति है। यानी यह एडवाइजरी कोई नया कानून नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद नियमों के पालन की याद दिलाने वाला औपचारिक निर्देश है। इसमें AI को लेकर दी गई सलाह जरूर नए दौर की जरूरत को दिखाती है, क्योंकि कई चैनल अब AI एंकर, AI से बने ग्राफिक्स और आवाज का इस्तेमाल करने लगे हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा
आम दर्शक के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अगर नियमों का पालन होता है तो टीवी डिबेट में चीख-पुकार, अपमानजनक भाषा और बिना पुष्टि के आरोप कम दिखने चाहिए। आतंकी मुठभेड़ जैसी स्थितियों में अब “लाइव” तस्वीरों की जगह आधिकारिक ब्रीफिंग पर आधारित जानकारी मिलेगी, जिसका मकसद सुरक्षा बलों की रणनीति को उजागर होने से बचाना है। पुराने हादसों के वीडियो पर टाइम-स्टैंप लगने से अफवाह और घबराहट कम हो सकती है। अगर आपको किसी चैनल का कोई कार्यक्रम आपत्तिजनक लगे, तो पहले उस चैनल से शिकायत की जा सकती है, फिर स्व-नियामक संस्था और उसके बाद मंत्रालय के स्तर तक शिकायत पहुंचाई जा सकती है।
आगे क्या
यह एडवाइजरी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए है। यूट्यूब और वेबसाइट जैसे डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म अलग नियमों, यानी आईटी नियम 2021 के दायरे में आते हैं। अब देखना होगा कि चैनल अपनी डिबेट और ब्रेकिंग कवरेज में क्या बदलाव करते हैं और क्या मंत्रालय आगे किसी चैनल पर कार्रवाई करता है। मीडिया संगठनों और ब्रॉडकास्टर्स की संस्थाओं की औपचारिक प्रतिक्रिया आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
स्रोत: द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और टेलीग्राफ इंडिया की 21-22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स, जिनमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एडवाइजरी का हवाला दिया गया है।

