भारतीय रिजर्व बैंक ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव नियमों को और सख्त कर दिया। मकसद साफ है—रुपये पर दबाव कम करना और सट्टा वाला डॉलर मांग नियंत्रित रखना।
Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार रुपये ने शुक्रवार को 96.73 प्रति डॉलर पर बंद किया, जो सर्वकालिक निचले स्तर 96.82 के करीब था। मई में इंट्राडे रिकॉर्ड लो 96.96 छू चुका है। इस साल रुपये में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है, जिससे यह एशिया की कमजोर मुद्राओं में गिना जा रहा है।
RBI ने क्या-क्या बदला?
20 प्रतिशत FERR कैश रिजर्व
$2 मिलियन से ऊपर के फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर Foreign Exchange Risk Reserve (FERR) के तहत 20 प्रतिशत नकद रखने की शर्त लगाई गई है। DBS बैंक के ट्रेजरी हेड Ashhish Vaidya के अनुसार इससे आयातकों की सट्टा डॉलर मांग पर लगाम लगाने की कोशिश है।
बिना अंडरलाइंग के लिमिट घटी
बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर साबित किए फॉरेक्स डेरिवेटिव करने की सीमा $100 मिलियन से घटाकर $5 मिलियन कर दी गई। एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में भी इसी दिशा में कटौती बताई गई है।
रद्द कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने पर रोक
निर्देश जारी होने के बाद किसी बैंक के साथ रद्द किए गए रुपये वाले फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट (डिलिवरेबल या नॉन-डिलिवरेबल) को दोबारा बुक करने की छूट नहीं रहेगी। मैच्योरिटी पर रोलओवर मौजूदा नियमों के अधीन जारी रह सकता है।
तेल कंपनियों के लिए खास विंडो
BPCL, HPCL और IndianOil की रोजाना डॉलर जरूरत के लिए विशेष विंडो का ऐलान किया गया। इससे बाजार से इन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की बड़ी डॉलर मांग का दबाव कम करने की उम्मीद है।
RBI का आधिकारिक रुख
RBI ने कहा कि ये कदम बाजार अनुशासन मजबूत करने, सही जोखिम प्रबंधन सुनिश्चित करने और व्यवस्थित-पारदर्शी बाजार माहौल बनाए रखने के लिए हैं।
बैंकर क्या कह रहे हैं?
Vaidya के मुताबिक 20 प्रतिशत लेवी बड़ी डॉलर हेजिंग को महंगा करेगी, डॉलर/रुपया प्रीमियम घटा सकती है, और OMC मांग बाजार से हटने व $5 मिलियन थ्रेशहोल्ड कटौती के साथ मिलकर डॉलर मांग घटाकर रुपये को सहारा दे सकती है।
कुछ बैंकरों ने चेताया कि उपाय बहुत पाबंद करने वाले हैं और बाजार गतिविधि घटा सकते हैं या रुपये के बाजार-निर्धारित मूल्य को बिगाड़ सकते हैं। Moneycontrol विश्लेषण में भी कहा गया कि RBI ऊंची दरों से विकास न मारते हुए सट्टा हमले रोकना चाहता है; सफलता अंततः क्रूड और FPI प्रवाह पर भी निर्भर करेगी।
आम आदमी को क्यों पता होना चाहिए?
कमजोर रुपये से आयातित पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेशी शिक्षा-यात्रा महंगी पड़ सकती है। निर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन महंगाई का दबाव परिवार के बजट पर पड़ता है। इसलिए केंद्रीय बैंक का मुद्रा प्रबंधन सीधे जेब से जुड़ा विषय है।
आगे की नजर
बाजार अब देखेगा कि ये कदम रुपये को स्थिर करते हैं या नहीं, फॉरवर्ड प्रीमियम कैसे बदलता है, और FPI बिकवाली थमती है या नहीं। अगर क्रूड और ऊंचा जाता है तो नीति और सख्त होने की चर्चा भी उठ सकती है—हालांकि यह अनुमान है, आधिकारिक अगला कदम समय बताएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
RBI ने नियम कब कड़े किए?
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को फॉरेक्स डेरिवेटिव मानदंड सख्त किए गए।
रुपये का हाल क्या था?
शुक्रवार का बंद भाव 96.73/डॉलर था, सर्वकालिक लो 96.82 के करीब; मई इंट्राडे लो 96.96; सालाना गिरावट करीब 7 प्रतिशत।
FERR क्या है?
$2 मिलियन से ऊपर के डेरिवेटिव पर 20 प्रतिशत नकद Foreign Exchange Risk Reserve रखने की शर्त।
तेल कंपनियों को क्या मिला?
BPCL, HPCL और IndianOil की दैनिक डॉलर जरूरत के लिए विशेष विंडो।

