बाढ़, ज़रूरत से ज़्यादा बारिश, ओलावृष्टि और चक्रवात की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को राहत भरी खबर आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से 9,18,091 प्रभावित किसानों के बैंक खातों में DBT के ज़रिए ₹493 करोड़ का कृषि निवेश अनुदान (एग्रीकल्चरल इनपुट सब्सिडी) भेजा।
पिछले एक हफ्ते में प्रदेश के कई हिस्सों में खड़ी फसलें बर्बाद हुई हैं। कुछ जगहों पर लोगों की जान गई है और पशुओं का भी नुकसान हुआ है। ऐसे वक्त में UP किसानों को 493 करोड़ की यह रकम सीधे खाते में पहुंचना अगली बुवाई के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।
UP किसानों को 493 करोड़: किसे और कैसे मिला पैसा
यह रकम उन किसानों को दी गई है जिनकी फसल बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि या चक्रवात से खराब हुई। सरकार के मुताबिक जिन ज़िलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे हुआ था, वहां के किसानों को तुरंत मदद मिल गई।
मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया में कोई बिचौलिया नहीं है। अगर किसी किसान के लिए ₹25,000 मंज़ूर हुए हैं, तो पूरे ₹25,000 सीधे उसके खाते में जाएंगे, एक रुपया भी कटे बिना।
“8-10 दिन में मुआवज़े का इंतज़ाम”
कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नुकसान के 8-10 दिनों के भीतर ही डबल इंजन सरकार ने फसल, मकान और पशुधन के नुकसान की भरपाई का इंतज़ाम कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि इस साल सिर्फ मानसून के दौरान ही आपदा से प्रभावित किसानों और नागरिकों को लगभग ₹1,000 करोड़ की सहायता दी जा चुकी है।
मकान, पशु और जनहानि पर अलग से मदद
₹493 करोड़ की यह राशि सिर्फ फसल नुकसान के लिए है। बाकी नुकसान के लिए अलग प्रावधान बताए गए:
- मकान क्षतिग्रस्त होने पर: मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अतिरिक्त ₹1.20 लाख।
- मकान पूरी तरह बह जाने पर: तुरंत आवास की सुविधा।
- आंशिक नुकसान पर: मुआवज़ा।
- पशुधन की हानि पर: आर्थिक सहायता।
- किसी व्यक्ति की मौत पर: 24 घंटे के भीतर परिवार को ₹4 लाख।
पहले भी जारी हो चुकी है रकम
सरकारी जानकारी के अनुसार इससे पहले ₹169 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। फसल नुकसान के लिए 1,29,326 किसानों को ₹78.75 करोड़ दिए गए थे, जबकि जनहानि, पशुहानि और मकानों के नुकसान के लिए पहले ₹225.93 करोड़ की मदद दी गई थी।
आकाशीय बिजली से बचाव और बीमा
मानसून में खेत में काम करते वक्त बिजली गिरने का खतरा सबसे ज़्यादा किसानों को होता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि लोगों को पहले से अलर्ट मिल सके।
साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत अगर बिजली गिरने से किसी किसान या बटाईदार के परिवार के सदस्य की मौत होती है, तो ₹5 लाख की सहायता दी जाती है।
सपा पर निशाना: “बिजली नहीं, बिल आते थे”
राहत राशि के कार्यक्रम में सियासी तंज भी दिखा। योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सपा सरकार में बिजली नहीं आती थी, लेकिन बिल आ जाते थे, और अब किसानों को बिना बिल के बिजली मिल रही है।
अपनी सरकार के कामकाज गिनाते हुए उन्होंने दावा किया कि:
- 2017 के बाद 86 लाख छोटे और सीमांत किसानों का ₹36,000 करोड़ का कर्ज़ माफ किया गया।
- 16 लाख निजी ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली दी जा रही है।
- 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त ज़मीन तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाई गई।
ये मुख्यमंत्री के अपने दावे हैं। विपक्ष की ओर से इन पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आने वाले दिनों में देखना होगा।
किसानों के लिए क्या मायने?
रबी की तैयारी से पहले खराब फसल का पैसा हाथ में आना किसान के लिए बड़ी बात है। बीज, खाद और जुताई का खर्च इसी रकम से निकल सकता है। सीधे खाते में पैसा आने से दफ्तरों के चक्कर काटने की परेशानी भी कम होती है। फिर भी जिन किसानों का नाम सूची में नहीं आया, उन्हें अपने स्तर पर स्थिति ज़रूर जांच लेनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
UP में कितने किसानों को 493 करोड़ रुपये मिले?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9,18,091 प्रभावित किसानों के खातों में DBT से कुल ₹493 करोड़ भेजे।
यह पैसा किस नुकसान के लिए दिया गया है?
यह कृषि निवेश अनुदान है, जो बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से हुई फसल क्षति के लिए दिया गया।
मकान गिरने पर क्या मदद मिलेगी?
क्षतिग्रस्त मकान वालों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत अतिरिक्त ₹1.20 लाख मिलेंगे। यह ₹493 करोड़ से अलग है।
पैसा खाते में आया या नहीं, कैसे पता करें?
अपनी बैंक पासबुक या खाते का स्टेटमेंट चेक करें। किसी दिक्कत पर स्थानीय तहसील या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

