छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) को लंबे समय से एक शिकायत रही है—कर्ज मिल जाता है, लेकिन बढ़ने के लिए जरूरी इक्विटी पूंजी कम पड़ जाती है। इसी गैप को भरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने SME ग्रोथ फंड (SGF) के लिए सरकार की ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता को मंजूरी दे दी है।
बजट 2026-27 का वादा अब कैबिनेट मंजूरी
यह फंड यूनियन बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित किया गया था। पीएम इंडिया के आधिकारिक अपडेट के अनुसार यह बजट के पैरा 28 के अनुरूप है, जिसमें MSME इकोसिस्टम के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट पर जोर दिया गया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कैबिनेट ने मंगलवार (6 अक्टूबर 2026) को यह फैसला लिया।
बजट भाषण में सीतारमण ने कहा था कि ₹10,000 करोड़ का समर्पित SME ग्रोथ फंड “फ्यूचर चैंपियंस” बनाने के लिए लाया जा रहा है। साथ ही सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड में माइक्रो उद्यमों के लिए ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप भी प्रस्तावित था।
लोन नहीं, डायरेक्ट ग्रोथ इक्विटी
सरकारी बयान के अनुसार मौजूदा कई फंड मुख्यतः अर्ली-स्टेज और माइक्रो उद्यमों पर केंद्रित हैं। स्मॉल और मीडियम सेगमेंट में ग्रोथ-स्टेज इक्विटी की कमी बनी हुई है। SME ग्रोथ फंड इसी संरचनात्मक अंतर को दूर करने के लिए बनाया गया है—उच्च क्षमता वाले, व्यवहार्य और स्केलेबल SMEs को “पेशेंट” ग्रोथ कैपिटल देने के लिए।
फंड अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) फ्रेमवर्क के तहत चलेगा। सरकार इस AIF में कुल ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता देगी। ज्यादातर आवंटन स्मॉल और मीडियम मैन्युफैक्चरिंग उद्यमों की ओर जाएगा। टियर-II और टियर-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टर्स में काम करने वाले SMEs पर भी विशेष ध्यान रहेगा।
क्या हासिल होने की उम्मीद?
सरकार का लक्ष्य है कि उद्यम क्षमता बढ़ाएं, नई तकनीक अपनाएं, निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करें और ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ें। क्षेत्रीय संतुलन, स्थानीय सप्लाई चेन और गुणवत्तापूर्ण रोजगार भी अपेक्षित नतीजों में शामिल हैं। यह पहल विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ी गई है।
इंडिया SME फोरम के प्रेसिडेंट विनोद कुमार ने कहा कि मजबूत निर्माता छोटे आपूर्तिकर्ताओं को बड़े ऑर्डर दे सकते हैं, जिससे मशीनरी, स्किल और रोजगार का चक्र बनता है। पूर्व FISME अध्यक्ष संदीप जैन ने AIF रूट को इनोवेटिव बताया और कहा कि इससे SMEs को सिर्फ डेट पर निर्भर रहने का दबाव कम हो सकता है।
अभी क्या बाकी है?
मंजूरी के बाद भी पात्रता मानदंड, निवेश टिकट साइज, फंड मैनेजर और आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत गाइडलाइन सार्वजनिक रूप से पूरी तरह जारी होना बाकी है। उद्यमियों को आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार रखना चाहिए। फिर भी दिशा साफ है—सरकार अब सिर्फ क्रेडिट नहीं, बल्कि ग्रोथ इक्विटी से मिड-साइज चैंपियन बनाने पर दांव लगा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
SME ग्रोथ फंड कितने करोड़ का है?
कैबिनेट ने फंड के लिए सरकार की ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता मंजूर की है।
यह लोन है या इक्विटी?
यह मुख्यतः डायरेक्ट ग्रोथ इक्विटी है, जो AIF फ्रेमवर्क के जरिए व्यवहार्य और स्केलेबल SMEs में निवेश करेगी—पारंपरिक लोन योजना नहीं।
किस तरह के उद्यमों पर फोकस है?
ज्यादातर आवंटन मैन्युफैक्चरिंग SMEs के लिए है। टियर-II और टियर-III औद्योगिक क्लस्टर्स में काम करने वाले उद्यम भी प्राथमिकता में हैं।
यह कब घोषित हुआ था?
वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 में इसकी घोषणा की थी; कैबिनेट ने 6 अक्टूबर 2026 को प्रतिबद्धता मंजूर की।

