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6 नवम्बर 2026, शुक्र

चक्रवात ‘मुरासु’ ने ओंगोल के पास आंध्र तट पार किया: 120 किमी/घंटा तक हवा, हजारों पेड़ उखड़े, फसलों-नावों को नुकसान; 6 जिलों में रेड अलर्ट

प्रकाशम जिले में ओंगोल के पास कोथापट्टनम बीच का हवाई दृश्य, जहां चक्रवात मुरासु का लैंडफॉल हुआ (फाइल फोटो)

बंगाल की खाड़ी में बना गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Murasu) मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकरा गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक तूफान ने प्रकाशम जिले के ओंगोल के पास, नेल्लोर और नरसापुर के बीच, सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच तट पार किया। उस समय हवा की रफ्तार 100-110 किमी प्रति घंटा थी, जो झोंकों में 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंची। लैंडफॉल की प्रक्रिया रात करीब 1 बजे ओंगोल के पास कोथापट्टनम बीच इलाके में शुरू हो गई थी।

तूफान ने कहां और कितना नुकसान किया

मीडिया रिपोर्ट्स (NDTV, The New Indian Express, The Indian Express) के अनुसार प्रकाशम, बापटला, पलनाडु और गुंटूर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। नेल्लोर, प्रकाशम और बापटला में हजारों पेड़ उखड़ गए, सैकड़ों बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए, मछुआरों की नावें टूट गईं और खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। कई निचले इलाकों में पानी भर गया। तेज बारिश और हवा के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों पर गाड़ियां फंस गईं और दृश्यता बहुत कम रही।

बिजली आपूर्ति को लेकर रिपोर्ट्स में अलग-अलग बातें सामने आई हैं: कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं बाधित हुईं, जबकि कुछ जगह आपूर्ति सामान्य बनी रहने की बात कही गई। अब तक मिली रिपोर्ट्स में किसी की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश

  • कोथापट्टनम (प्रकाशम): 16.4 सेमी, जो सोमवार सुबह 8:30 से मंगलवार सुबह 5 बजे के बीच राज्य में सबसे ज्यादा रही।
  • नागुलुप्पलपाडु (प्रकाशम): 11.4 सेमी
  • चिराला (बापटला): 10 सेमी
  • जिला औसत के हिसाब से बापटला में सबसे ज्यादा 40.02 मिमी बारिश दर्ज हुई।

कोथापट्टनम के एक मछुआरे ने समाचार एजेंसी PTI से कहा कि यह पिछले 14 साल में देखा गया सबसे खतरनाक चक्रवात है। उनके मुताबिक प्रशासन ने गांव के करीब 400 परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया और NDRF की टीमों ने भी मदद की।

अभी खतरा टला नहीं: रेड अलर्ट वाले जिले

IMD का कहना है कि तट पार करने के बाद भी खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। तूफान उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर होगा। मंगलवार दोपहर तक इसके चक्रवाती तूफान (80-90 किमी/घंटा, झोंके 100 किमी/घंटा) और आधी रात तक गहरे दबाव (55-65 किमी/घंटा, झोंके 75 किमी/घंटा) में बदलने का अनुमान है।

कृष्णा, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, मार्कापुरम और प्रकाशम जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी है, जहां कुछ जगह अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। तटीय आंध्र में मंगलवार को कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है और दक्षिण तटीय आंध्र में शाम तक तेज बारिश के दौर जारी रह सकते हैं। IMD ने पहले ही बापटला, कृष्णा और प्रकाशम में सामान्य ज्वार से 1 से 1.5 मीटर ऊंची समुद्री लहरों (स्टॉर्म सर्ज) की चेतावनी दी थी। तूफान का असर पड़ोसी ओडिशा और तमिलनाडु में भी महसूस किया गया।

पृष्ठभूमि: एक के बाद एक दूसरा तूफान

इस साल अक्टूबर-नवंबर में आंध्र प्रदेश का तट लगातार तूफानों की मार झेल रहा है। इससे पहले चक्रवात ‘अर्नब’ ने यानम-काकीनाडा इलाके को प्रभावित किया था। ‘मुरासु’ पिछले कुछ दिनों से बंगाल की खाड़ी में मजबूत हो रहा था और मौसम विभाग ने 1 नवंबर को ही 3 नवंबर को लैंडफॉल का अनुमान जता दिया था। समय पर चेतावनी और लोगों को निकालने के कारण इस बार जान-माल का नुकसान सीमित रखने में मदद मिली है, हालांकि फसलों और मछुआरों की संपत्ति को हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।

लैंडफॉल का मतलब है कि तूफान का केंद्र (आंख) समुद्र से जमीन पर आ गया। जमीन पर पहुंचने के बाद तूफान को समुद्र की गर्म नमी नहीं मिलती, इसलिए वह कमजोर होने लगता है। लेकिन कमजोर होते समय भी यह आगे बढ़ते हुए अंदरूनी जिलों में भारी बारिश करा सकता है, इसलिए अगले 24 घंटे अहम हैं।

आप पर क्या असर पड़ेगा और क्या करें

  • प्रभावित जिलों के लोग: प्रशासन की सलाह के बिना राहत शिविर या सुरक्षित जगह से घर न लौटें। गिरे हुए बिजली के तारों और खंभों से दूर रहें, भरे पानी में न उतरें।
  • यात्री: तटीय आंध्र के हाईवे पर सफर टालें या निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन, रेलवे और एयरलाइन से ताजा जानकारी ले लें, क्योंकि पेड़ गिरने और जलभराव से रास्ते बंद हो सकते हैं।
  • मछुआरे: मौसम विभाग की अगली सूचना तक समुद्र में न जाएं।
  • किसान: फसल नुकसान का ब्योरा और फोटो सुरक्षित रखें, ताकि राज्य सरकार के सर्वे और फसल बीमा (जहां लागू हो) के दावे में दिक्कत न हो।

आगे क्या

मंगलवार आधी रात तक तूफान के गहरे दबाव में बदलने के बाद बारिश धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से नुकसान का सर्वे और राहत पैकेज पर फैसला अहम रहेगा। ताजा जानकारी के लिए IMD के आधिकारिक बुलेटिन (mausam.imd.gov.in) और जिला प्रशासन की सूचनाओं पर ही भरोसा करें, सोशल मीडिया की बिना पुष्टि वाली खबरों से बचें।

स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) बुलेटिन, NDTV, The New Indian Express, The Indian Express, PTI।

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