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6 नवम्बर 2026, शुक्र

Karnataka SC ST आरक्षण: हाईकोर्ट ने 50% सीमा पार करने वाला 2022 कोटा वृद्धि कानून रद्द किया

बेंगलुरु में कर्नाटक हाईकोर्ट की इमारत का दृश्य

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरक्षण की बहस को फिर सुर्खियों में ला दिया। सोमवार को अदालत ने 2022 के उस कानून के प्रावधान रद्द कर दिए, जिनसे अनुसूचित जाति (SC) का कोटा 15% से 17% और अनुसूचित जनजाति (ST) का कोटा 3% से 7% बढ़ाया गया था। नतीजा—राज्य का कुल आरक्षण 50% की सीमा पार कर 56% हो गया था।

Indian Express और Bar & Bench के अनुसार, चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की बेंच ने कहा कि 50% की छत पार करना संविधान के समानता वाले प्रावधानों के खिलाफ है।

अदालत ने क्या रद्द किया?

आदेश में कहा गया—‘Section 3 of the Act, insofar as it takes the aggregate reservation beyond the ceiling of 50 percent, is struck down as it violates Articles 14 and 15… Section 4 … violates Articles 14 and 16.’ यानी शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों—दोनों में बढ़ाया गया SC/ST कोटा असंवैधानिक माना गया।

अदालत ने साफ किया कि सिर्फ यह कह देना कि पिछड़ा वर्ग आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं रखता, 50% पार करने का आधार नहीं बनता।

50% सीमा कहां से आई?

1992 के इंद्रा साहनी (मandal) फैसले में सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने आरक्षण पर सामान्यतः 50% की सीमा तय की थी। असाधारण परिस्थितियों में छूट की गुंजाइश छोड़ी गई, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि ‘कुछ प्रतिशत और बढ़ा दें’ जैसी व्यक्तिपरक राय असाधारण स्थिति नहीं है।

सरकार की दलील थी कि राज्य की 90% से ज्यादा आबादी SC/ST/OBC है, इसलिए कोटा आबादी के अनुपात में होना चाहिए। अदालत ने इसे खारिज किया।

कमीशनों से सलाह क्यों जरूरी थी?

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अनुच्छेद 338(9) और 338-A(9) के तहत राष्ट्रीय SC और ST आयोगों से सलाह लेना अनिवार्य था। अदालत ने माना कि कानून पास करने के बाद महज पत्र लिखना सलाह नहीं माना जा सकता—सलाह फैसले से पहले होनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने लगभग तीन साल बाद पत्र लिखा।

आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या

शिक्षा और नौकरी: फैसला लागू रहने पर बढ़ा हुआ 2% SC और 4% ST कोटा वापस पुराने स्तर पर लौट सकता है। जिन अभ्यर्थियों ने बढ़े कोटे के सहारे आवेदन/प्रवेश लिया, उनके भविष्य के बैचों पर असर पड़ेगा। मौजूदा छात्रों के अधिकार अलग कानूनी सवाल हो सकते हैं।

राजनीतिक असर: कर्नाटक में आरक्षण संवेदनशील चुनावी मुद्दा है। सरकार अपील/विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में ले जा सकती है। OBC कोटा नहीं बढ़ाया गया था—यह भी बहस का हिस्सा बना रहेगा।

आगे क्या देखें:

  • राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है या नहीं
  • क्या कोई अंतरिम स्टे मांगा जाता है
  • नए शैक्षणिक सत्र/भर्ती नोटिफिकेशन में कोटा कैसे लिखा जाता है
  • कमीशनों से नई सलाह प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं

सीधी भाषा में: अदालत ने कहा—आरक्षण जरूरी हो सकता है, लेकिन 50% की रेखा आसानी से नहीं तोड़ी जा सकती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कर्नाटक हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?

2022 के कानून के तहत बढ़ाया गया SC (15→17%) और ST (3→7%) आरक्षण रद्द कर दिया, क्योंकि कुल आरक्षण 56% होकर 50% की सीमा पार कर गया।

बेंच में कौन जज थे?

चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा।

क्या पूरा आरक्षण खत्म हो गया?

नहीं। बढ़ा हुआ हिस्सा असंवैधानिक ठहराया गया है। पुरानी 50% सीमा के भीतर का ढांचा बना रहता है, जब तक कोई और आदेश न आए।

सरकार आगे क्या कर सकती है?

सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है। रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार कानूनी विकल्प तौल रही है।

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