दिवाली नजदीक है और दिल्ली-NCR में पटाखों की बहस फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सोमवार को CJI सूर्यकांत की बेंच ने साफ संकेत दिया—धार्मिक भावनाओं को चोट नहीं पहुंचाई जाएगी, लेकिन स्वास्थ्य खतरे को देखते हुए लोगों को खुद संयम अपनाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे आदेश न दिए जाएं जिन्हें धरातल पर लागू करना मुश्किल हो।
Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई वायु प्रदूषण संबंधी स्वतः संज्ञान कार्यवाही का हिस्सा है, जिसमें पटाखे, पराली जलाना और कचरा प्रबंधन भी जुड़े हैं।
अदालत ने क्या कहा?
CJI ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि जनता जागरूक होकर खुद आगे आए। उन्होंने चेतावनी दी—‘We have to be extremely careful in passing an order unless we are in a position to make it manageable and enforceable.’ यानी सिर्फ कागजी पाबंदी काफी नहीं, अगर पुलिस हर गली में निगरानी न कर सके।
जस्टिस बागची ने पूछा—पटाखे फोड़ने में धार्मिक क्या है? अमिका क्यूरी अपराजिता सिंह ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों पर प्रदूषण का असर याद दिलाया। अदालत ने सुझाव दिया कि ज्यादा प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री रोकी जा सकती है और सुरक्षित विकल्प बढ़ावा दिए जा सकते हैं; दीये और फुलझड़ियों वाली परंपरा की तरफ लौटने की बात भी हुई।
ग्रीन क्रैकर्स और पुराना फ्रेमवर्क
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने याद दिलाया कि ग्रीन क्रैकर्स का ढांचा पहले से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हिस्सा है। पिछले साल पूर्ण बैन में राहत देकर सीमित दिनों के लिए ग्रीन क्रैकर्स की बिक्री/फोड़ने की खिड़की दी गई थी। इस सुनवाई में सख्त नई पाबंदी पर अदालत ने फिलहाल संयम और जागरूकता वाला रुख अपनाया।
अलग अर्जुन गोपाल मामले में इससे पहले कोर्ट ने संयुक्त (लाड़ी) ग्रीन क्रैकर्स पर शर्तों के साथ राहत और बेरियम टेस्टिंग का मुद्दा अक्टूबर 15 तक टाला था—दिल्ली-NCR के लिए MC मेहता बेंच अलग देख रही है। आम पाठक के लिए मतलब: नियम एक साथ कई बेंचों में चल रहे हैं, अंतिम दिवाली गाइडलाइन पर नजर रखें।
दिल्ली में बारिश के बाद हवा
संदर्भ के लिए: India Today के अनुसार सोमवार की बारिश के बाद दिल्ली का औसत AQI 83 (संतोषजनक) रहा—अक्टूबर में पहली बार। लेकिन Early Warning System का अनुमान है कि 13–15 अक्टूबर को मध्यम श्रेणी और उसके बाद मध्यम से खराब स्तर लौट सकता है। दिवाली पर पटाखे इस चक्र को और बिगाड़ सकते हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा / आगे क्या
घर और स्वास्थ्य: बच्चों, अस्थमा मरीजों और बुजुर्गों के लिए रात का धुआं खतरनाक हो सकता है। अदालत का जोर स्वयं-संयम पर है—मतलब परिवार खुद तय कर सकता है कि दीये ज्यादा, लाड़ियां कम।
दुकानदार और स्टॉक: अगर बिक्री पर स्थानीय पाबंदी या सिर्फ ग्रीन क्रैकर्स अनुमति रहती है, तो पारंपरिक पटाखा विक्रेताओं को स्टॉक और लाइसेंस नियमों का पालन करना होगा। खरीदारों को पैकेट पर ग्रीन सर्टिफिकेशन चेक करना चाहिए।
आगे क्या देखें:
- दिल्ली-NCR के लिए कोई नया लिखित आदेश आता है या नहीं
- 15 अक्टूबर के आसपास बेरियम/Gen-2 परीक्षण रिपोर्ट
- राज्य प्रदूषण बोर्ड और पुलिस की दिवाली गाइडलाइन
- AQI पूर्वानुमान दिवाली सप्ताह में
सीधी सलाह: कानूनी खिड़की जो भी हो, सेहत का हिसाब खुद रखना पड़ेगा। अदालत भी यही कह रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पूर्ण पटाखा बैन लगा दिया?
नहीं। सोमवार की सुनवाई में अदालत ने पूर्ण बैन या कठोर नई पाबंदी के बजाय जागरूकता और स्वयं-संयम पर जोर दिया, और कहा कि लागू न हो सकने वाले आदेश न दिए जाएं।
बेंच में कौन थे?
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जयमल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना।
ग्रीन क्रैकर्स की अनुमति है?
पिछले आदेशों के तहत सीमित अवधि में ग्रीन क्रैकर्स की व्यवस्था रही है। इस साल दिल्ली-NCR के लिए अंतिम लिखित निर्देश अलग कार्यवाहियों में साफ होंगे—स्थानीय आधिकारिक गाइडलाइन देखें।
आम परिवार क्या करे?
बच्चों और बीमार सदस्यों का ध्यान रखें, कम धुआं वाले विकल्प चुनें, और स्थानीय पुलिस/प्रदूषण बोर्ड की समय-सीमा का पालन करें।

