भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने जर्मनी में हायलो ओपन 2026 (Hylo Open) का महिला सिंगल्स खिताब जीत लिया है। रविवार, 1 नवंबर को सारब्रुकेन में खेले गए फाइनल में सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क क्जेर्सफेल्ड (Line Højmark Kjærsfeldt) को सीधे गेमों में 21-12, 21-14 से हराया। यह इस सीजन में सिंधु का दूसरा BWF खिताब है। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन जीता था।
फाइनल में कैसे जीतीं सिंधु?
स्पोर्टस्टार और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबले की शुरुआत में क्जेर्सफेल्ड ने 5-3 की बढ़त ली, लेकिन सिंधु जल्दी लय में आ गईं। उन्होंने अपनी लंबाई का फायदा उठाते हुए बेसलाइन तक गहरे क्लियर खेले, बीच-बीच में क्रॉस-कोर्ट स्मैश लगाए और नेट पर आकर विरोधी से गलतियां करवाईं। पहले गेम के ब्रेक पर स्कोर 11-8 था और सिंधु ने यह गेम 21-12 से जीत लिया।
दूसरे गेम में शुरुआत में स्कोर 2-2 पर बराबर रहा, फिर सिंधु ने तीन अंकों की बढ़त बना ली। ब्रेक पर वह 11-7 से आगे थीं। क्जेर्सफेल्ड ने रफ्तार बढ़ाकर फ्लैट शटल खेलने की कोशिश की, पर लगातार उसी लय में खेलना उनके लिए मुश्किल रहा। आखिर में विरोधी की गलती के साथ सिंधु ने 21-14 से मैच खत्म किया।
ताजगी बनी बड़ा फर्क
फाइनल से पहले दोनों खिलाड़ियों के सेमीफाइनल बिल्कुल अलग रहे थे। सिंधु ने सेमीफाइनल में भारत की ही अनमोल खरब को 21-13, 21-16 से आसानी से हराया था। वहीं BWF की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड नंबर 25 क्जेर्सफेल्ड को थाईलैंड की पोर्नपवी चोचुवोंग के खिलाफ 88 मिनट तक जूझना पड़ा और उन्होंने चार मैच पॉइंट बचाकर 8-21, 21-19, 28-26 से जीत दर्ज की थी। इससे पहले अपने पिछले छह टूर्नामेंट में वह पहले ही राउंड में बाहर हो गई थीं। जानकारों के मुताबिक लंबे सेमीफाइनल की थकान का असर फाइनल में दिखा और सिंधु ने उन्हें लगातार कोर्ट के पीछे के कोनों में दौड़ाया।
सिंधु के लिए यह जीत क्यों अहम है?
- सीजन का दूसरा खिताब: जुलाई में जापान ओपन जीतकर सिंधु यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बनी थीं। वह उनका पहला BWF सुपर 750 खिताब भी था। अब हायलो ओपन (सुपर 500) जीतकर उन्होंने उस फॉर्म को आगे बढ़ाया है।
- वर्ल्ड टूर फाइनल्स की दौड़: हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इस जीत से सिंधु दिसंबर में होने वाले साल के आखिरी BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने की अच्छी स्थिति में आ गई हैं।
- अनुभव का दम: दो ओलंपिक मेडल और वर्ल्ड चैंपियनशिप खिताब जीत चुकी सिंधु ने एक बार फिर दिखाया कि बड़े मैच में दबाव संभालना उन्हें आता है।
हायलो ओपन क्या है?
हायलो ओपन BWF वर्ल्ड टूर का सुपर 500 स्तर का टूर्नामेंट है, जो जर्मनी के सारब्रुकेन में सारलैंडहाले में खेला जाता है। आयोजकों के मुताबिक इस साल यह 27 अक्टूबर से 1 नवंबर तक चला और इसकी इनामी राशि 5 लाख अमेरिकी डॉलर रही। सुपर 500 टूर्नामेंट जीतने पर खिलाड़ियों को अच्छे-खासे रैंकिंग पॉइंट मिलते हैं, जो साल के अंत में होने वाले फाइनल्स की योग्यता के लिए अहम होते हैं।
लक्ष्य सेन भी फाइनल में
भारत के लिए यह दिन और खास इसलिए रहा क्योंकि पुरुष सिंगल्स के फाइनल में लक्ष्य सेन भी पहुंचे। सातवीं वरीयता वाले लक्ष्य ने सेमीफाइनल में फ्रांस के टोमा जूनियर पोपोव को 21-17, 21-13 से हराया था। यह मार्च में ऑल इंग्लैंड के बाद उनका पहला फाइनल है। फाइनल में उनका सामना इंडोनेशिया के चौथी वरीयता प्राप्त और डिफेंडिंग चैंपियन जोनाथन क्रिस्टी से है। दोनों के बीच अब तक के मुकाबलों में क्रिस्टी 4-3 से आगे हैं, हालांकि पिछले दो मुकाबले लक्ष्य ने सीधे गेमों में जीते थे। लक्ष्य 2019 में यह टूर्नामेंट जीत चुके हैं। यह खबर लिखे जाने तक पुरुष फाइनल का नतीजा नहीं आया था।
आगे क्या?
सिंधु अब साल के बाकी टूर्नामेंटों में इसी फॉर्म को बनाए रखकर वर्ल्ड टूर फाइनल्स का टिकट पक्का करना चाहेंगी। भारतीय बैडमिंटन फैंस के लिए यह अच्छा संकेत है कि लंबे समय बाद एक ही हफ्ते में भारत की महिला और पुरुष सिंगल्स, दोनों में मजबूत चुनौती दिखी है।
स्रोत: स्पोर्टस्टार (द हिंदू), हिंदुस्तान टाइम्स, BWF वर्ल्ड टूर, HYLO Open आधिकारिक वेबसाइट।

