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6 नवम्बर 2026, शुक्र

विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत में अत्यधिक गरीबी 27.1% से घटकर 2.6%, 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर; पर टॉप 10% की कमाई नीचे के 10% से 13 गुना

वॉशिंगटन डीसी में विश्व बैंक समूह के मुख्यालय की दीवार पर लिखा 'The World Bank Group'

विश्व बैंक (World Bank) की नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पिछले एक दशक में दुनिया में सबसे तेजी से गरीबी घटाने वाले देशों में जगह बनाई है। ‘इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ: अक्टूबर 2026’ में कहा गया है कि 2011 से 2023 के बीच भारत में अत्यधिक गरीबी (3 डॉलर प्रतिदिन से कम पर गुजारा) 27.1% से घटकर सिर्फ 2.6% रह गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस रिपोर्ट को “ऐतिहासिक” बताया है, वहीं रिपोर्ट ने कमाई में भारी असमानता को लेकर चेतावनी भी दी है।

रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े

  • 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर: लोअर मिडिल-इनकम देशों की गरीबी रेखा (4.20 डॉलर प्रतिदिन, 2021 PPP) से नीचे रहने वालों का हिस्सा 2011 के 57.7% से घटकर 2023 में 16.1% रह गया। विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक इससे करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।
  • अत्यधिक गरीबी 2.6%: 3 डॉलर प्रतिदिन की रेखा पर अत्यधिक गरीबी 27.1% से गिरकर 2.6% पर आ गई।
  • आगे का अनुमान: 4.20 डॉलर वाली रेखा पर गरीबी दर 2026 के 14.2% से घटकर 2028 तक 12.1% होने का अनुमान है। बैंक ने कहा है कि यह गिरावट अब पहले से धीमी रहेगी।
  • बहुआयामी गरीबी: OPHI के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के मुताबिक गरीबी 2005-06 के 53.8% से घटकर 2019-21 में 16.4% रह गई, जबकि विश्व बैंक के अपने MPI पैमाने पर 2022-23 में यह 15.5% रही।
  • रोजगार: 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जो कामकाजी उम्र की आबादी की बढ़ोतरी का लगभग दोगुना है।

गरीबी घटी क्यों? विश्व बैंक ने गिनाईं ये वजहें

रिपोर्ट के मुताबिक इस सुधार के पीछे तीन मुख्य कारण रहे: खपत (consumption) में मजबूत बढ़ोतरी, रोजगार में इजाफा, खासकर महिलाओं का काम में आना, और खाद्य सब्सिडी समेत सामाजिक योजनाओं (social transfers) का विस्तार। विश्व बैंक ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के भुगतान वाले काम में आने से घरों में कमाने वालों की संख्या बढ़ी। ग्रामीण इलाकों में शहरी इलाकों से तेज सुधार हुआ, जिससे गांव और शहर के बीच का फासला कम हुआ।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

PTI के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, “भारत ने दुनिया में सबसे तेज गरीबी गिरावट में से एक दर्ज की है। यह विश्व बैंक कह रहा है।” उन्होंने कहा कि अत्यधिक गरीबी करीब 90% घटी है, यानी पहले चार में से एक से ज्यादा भारतीय इस दायरे में थे और अब करीब 38 में से एक। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के पुराने ‘गरीबी हटाओ’ नारे पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार के लिए गरीबी मिटाना सिर्फ नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है। उन्होंने यह दावा भी किया कि भारत का गिनी इंडेक्स 20% से ज्यादा घटकर 23.0 पर आ गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी 30 अक्टूबर को रिपोर्ट जारी होने के बाद इसे सरकार की नीतियों का नतीजा बताया था।

रिपोर्ट की चेतावनी: कमाई में बड़ा फासला

रिपोर्ट सिर्फ अच्छी खबर नहीं देती। विश्व बैंक के मुताबिक 2023 में सबसे ऊपर के 10% कामगारों की औसत (मीडियन) कमाई सबसे नीचे के 10% कामगारों से करीब 13 गुना थी। यानी वेतन की असमानता अब भी बहुत ज्यादा है।

रिपोर्ट ने यह भी कहा कि गरीबी अब कुछ खास घरों और इलाकों में सिमटती जा रही है। जिन परिवारों में शिक्षा कम है, संपत्ति कम है, स्थायी नौकरी तक पहुंच नहीं है और आश्रितों की संख्या ज्यादा है, वहां गरीबी ज्यादा टिकी हुई है। भौगोलिक रूप से उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैली पट्टी में देश के करीब 57% गरीब रहते हैं। विश्व बैंक के मुताबिक आगे राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी घटाना काफी हद तक इन्हीं राज्यों में उत्पादक रोजगार बढ़ाने पर निर्भर करेगा।

गरीबी रेखा 3 डॉलर और 4.20 डॉलर का मतलब क्या?

विश्व बैंक अलग-अलग देशों की तुलना के लिए ‘परचेजिंग पावर पैरिटी’ (PPP) का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब है कि 3 डॉलर को सीधे बाजार के एक्सचेंज रेट से रुपये में नहीं बदला जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि भारत में उतनी रकम से कितना सामान और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। 3 डॉलर प्रतिदिन की रेखा ‘अत्यधिक गरीबी’ के लिए है, जबकि 4.20 डॉलर की रेखा भारत जैसे लोअर मिडिल-इनकम देशों के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है।

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?

आंकड़े बताते हैं कि बीते दशक में बड़ी आबादी न्यूनतम जरूरतों से ऊपर उठी है। लेकिन 4.20 डॉलर की रेखा पर अब भी 2026 में करीब 14.2% आबादी के गरीब रहने का अनुमान है, और कमाई की असमानता बड़ी चुनौती है। आने वाले वर्षों में असली सवाल यह रहेगा कि युवाओं के लिए अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां कितनी बनती हैं और पूर्वी भारत के राज्यों में रोजगार के मौके कितनी तेजी से बढ़ते हैं।

स्रोत: विश्व बैंक ‘India Poverty and Equity Brief: October 2026’, PTI/द हिंदू, द हिंदू बिजनेसलाइन।

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