त्योहारी सीज़न में केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने 15 अक्टूबर 2026 को ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी कर लेखा वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन की परिलब्धियों (emoluments) के बराबर नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस, यानी एड-हॉक बोनस को राष्ट्रपति की मंज़ूरी की जानकारी दी है। ज़्यादातर पात्र कर्मचारियों को इस आदेश के तहत अधिकतम ₹6,908 मिलेंगे।
यह बोनस ग्रुप C के सभी केंद्रीय कर्मचारियों और ग्रुप B के सभी अराजपत्रित (non-gazetted) कर्मचारियों को मिलेगा, बशर्ते वे किसी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) स्कीम के दायरे में न आते हों। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और सशस्त्र बलों के पात्र कर्मचारी भी इसमें शामिल हैं। सोशल मीडिया और गूगल पर “दिवाली बोनस” को लेकर सबसे ज़्यादा सवाल यही हैं कि किसे मिलेगा, रकम कैसे तय होती है और रेलवे या डाक कर्मचारियों से यह इतना कम क्यों है। इस रिपोर्ट में आदेश की हर ज़रूरी शर्त को आसान भाषा में समझिए।
आदेश में क्या कहा गया है
व्यय विभाग के OM (फाइल संख्या 7/24/2007-E-III(A), दिनांक 15.10.2026) पर निदेशक उमेश कुमार अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं। इसकी मुख्य बातें ये हैं:
- बोनस की अवधि: 30 दिन की परिलब्धियों के बराबर, लेखा वर्ष 2025-26 के लिए।
- कौन पात्र: ग्रुप C के सभी और ग्रुप B के सभी अराजपत्रित केंद्रीय कर्मचारी, जो किसी PLB स्कीम में नहीं आते।
- गणना की सीमा (calculation ceiling): ₹7,000 प्रति माह।
- CAPF और सशस्त्र बल: इनके पात्र कर्मचारियों को भी यही बोनस मिलेगा।
- केंद्र शासित प्रदेश: जिन UT प्रशासनों में केंद्र सरकार वाला वेतन ढांचा लागू है और जो किसी दूसरी बोनस या एक्स-ग्रेशिया स्कीम में नहीं आते, उनके कर्मचारियों पर भी आदेश लागू माना जाएगा।
- खर्च: हर मंत्रालय/विभाग इसे वित्त वर्ष 2026-27 के अपने मंज़ूर बजट से देगा।
₹6,908 का हिसाब कैसे बनता है
आदेश में ही गणना का फॉर्मूला दिया गया है। एक दिन का बोनस निकालने के लिए साल भर की औसत मासिक परिलब्धियों (या ₹7,000 की सीमा, जो भी कम हो) को 30.4 से भाग दिया जाता है। 30.4 को एक महीने में दिनों की औसत संख्या माना गया है। फिर इसे बोनस के दिनों से गुणा किया जाता है।
फॉर्मूला: बोनस = औसत मासिक परिलब्धियां (अधिकतम ₹7,000) × 30 ÷ 30.4
जिस कर्मचारी की औसत मासिक परिलब्धियां ₹7,000 या उससे ज़्यादा हैं, उसके लिए हिसाब ₹7,000 × 30 ÷ 30.4 = ₹6,907.89 बनता है, जिसे राउंड करके ₹6,908 किया गया है। OM के मुताबिक सभी भुगतान नज़दीकी रुपये में राउंड किए जाएंगे।
सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्र में न्यूनतम मूल वेतन ही ₹18,000 है। इसलिए व्यवहार में लगभग हर नियमित पात्र कर्मचारी की परिलब्धियां ₹7,000 की सीमा से ऊपर होंगी, और पूरे साल नौकरी करने वाले कर्मचारी को पूरी ₹6,908 की रकम मिलेगी। अगर किसी मामले में औसत परिलब्धियां ₹7,000 से कम हैं, तो बोनस असली औसत पर बनेगा। उदाहरण के लिए, ₹6,000 की औसत पर यह ₹6,000 × 30 ÷ 30.4 = करीब ₹5,921 होगा।
कौन पात्र, किसे पूरा और किसे आंशिक बोनस
बोनस पाने की बुनियादी शर्त यह है कि कर्मचारी 31 मार्च 2026 को सेवा में रहा हो और उसने 2025-26 के दौरान कम से कम छह महीने की लगातार सेवा की हो। छह महीने से लेकर पूरे साल तक की सेवा पर बोनस प्रो-राटा यानी अनुपात में मिलेगा। सेवा के महीने नज़दीकी पूरे महीने में राउंड करके गिने जाएंगे।
प्रो-राटा का मतलब है कि पूरी रकम को 12 से भाग देकर सेवा के महीनों से गुणा किया जाएगा। ₹7,000 की सीमा वाले कर्मचारी के लिए यह हिसाब कुछ ऐसा बैठता है (हमारी गणना, आदेश के फॉर्मूले के आधार पर):
- 6 महीने की सेवा: करीब ₹3,454
- 8 महीने की सेवा: करीब ₹4,605
- 9 महीने की सेवा: करीब ₹5,181
- 10 महीने की सेवा: करीब ₹5,757
- 12 महीने (पूरा साल): ₹6,908
OM के साथ लगे अनुलग्नक (Annexure) में कुछ खास स्थितियां भी साफ की गई हैं:
- अस्थायी एड-हॉक नियुक्ति वाले कर्मचारी: सेवा में ब्रेक न हो तो पात्र।
- 31 मार्च 2026 से पहले रिटायर, मेडिकल आधार पर सेवानिवृत्त या जिनका निधन हुआ: विशेष मामले के तौर पर, अगर उन्होंने साल में कम से कम छह महीने नियमित सेवा की थी, तो प्रो-राटा बोनस मिलेगा। सामान्य इस्तीफा देने वालों को यह छूट नहीं दी गई है।
- राज्य सरकार, PSU आदि में डेप्युटेशन पर गए कर्मचारी: मूल विभाग बोनस नहीं देगा; ज़िम्मेदारी उस संस्था की होगी जहां वे 31 मार्च 2026 को तैनात थे, उसकी अपनी स्कीम के हिसाब से।
- बिना वेतन छुट्टी (EOL) और डाइस-नॉन: यह अवधि पात्रता में नहीं गिनी जाएगी, लेकिन इसे सेवा में ब्रेक भी नहीं माना जाएगा। बाकी तरह की छुट्टियां गिनी जाएंगी।
- निलंबन: निलंबन के दौरान मिलने वाला गुज़ारा भत्ता परिलब्धि नहीं माना जाएगा। बहाली के बाद उस अवधि का वेतन मिलने पर ही बोनस का हक बनेगा।
- दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त कर्मचारी: दोनों अवधियों का हिसाब अलग होगा, लेकिन कुल रकम इस आदेश की अधिकतम सीमा से ज़्यादा नहीं होगी।
- मामूली तय भुगतान पर रखे गए पार्ट-टाइम कर्मचारी: पात्र नहीं।
कैजुअल लेबर को कितना मिलेगा
आदेश कैजुअल मज़दूरों को भी शामिल करता है, लेकिन उनकी शर्तें और रकम अलग हैं। छह दिन वाले हफ्ते के दफ्तरों में जिन कैजुअल लेबर ने तीन या उससे ज़्यादा साल तक हर साल कम से कम 240 दिन काम किया है (पांच दिन वाले हफ्ते के दफ्तरों में 206 दिन), वे पात्र होंगे। उनके लिए गणना की सीमा ₹1,200 प्रति माह है, यानी ₹1,200 × 30 ÷ 30.4 = ₹1,184। अगर असली मासिक मज़दूरी ₹1,200 से कम है, तो बोनस उसी असली रकम पर बनेगा। नियमित कर्मचारियों वाली “31 मार्च को सेवा में होने” की शर्त कैजुअल लेबर पर लागू नहीं होती।
रेलवे को ₹17,951 और डाक कर्मचारियों को ज़्यादा बोनस क्यों
यह सवाल हर साल उठता है। असल में सीमा तीनों के लिए एक ही है: ₹7,000 प्रति माह। फर्क बोनस के दिनों का है।
- रेलवे: गैर-राजपत्रित रेल कर्मचारियों को प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) 78 दिन का मिलता है। इस साल कैबिनेट ने करीब 11.4 लाख कर्मचारियों के लिए यह मंज़ूर किया है, जिसमें अधिकतम रकम ₹17,951 है। पूरी खबर हमारी रेलवे PLB बोनस 78 दिन वाली रिपोर्ट में पढ़ें।
- डाक विभाग: डाक विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को अपने MTS, ग्रुप C और अराजपत्रित ग्रुप B कर्मचारियों के लिए 60 दिन का PLB मंज़ूर किया है। साथ ही नियमित ग्रामीण डाक सेवकों को एक्स-ग्रेशिया बोनस और पात्र कैजुअल लेबर को एड-हॉक बोनस मिलेगा। ₹7,000 की सीमा पर 60 दिन का बोनस फॉर्मूले से करीब ₹13,816 बनता है।
- बाकी मंत्रालय/विभाग: जहां कोई PLB स्कीम नहीं है, वहां 30 दिन का एड-हॉक बोनस, यानी अधिकतम ₹6,908।
PLB स्कीम विभाग के कामकाज और उत्पादकता से जुड़ी होती है। रेलवे में इसकी गणना में माल ढुलाई जैसे आउटपुट को भी देखा जाता है। एड-हॉक बोनस में ऐसा कोई पैमाना नहीं होता, इसलिए दिन तय रहते हैं।
₹7,000 की सीमा पर विवाद
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी शिकायत यही ₹7,000 की सीमा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह सीमा 2014-15 से नहीं बदली है। रेलवे के इंडियन रेलवेज़ टेक्निकल सुपरवाइज़र्स एसोसिएशन (IRTSA) ने इसे बढ़ाकर ₹18,000 और महंगाई भत्ता करने की मांग की है। डाक कर्मचारियों के संगठनों ने भी 8वें वेतन आयोग से इस सीमा की समीक्षा की मांग उठाई है। ये फिलहाल सिर्फ मांगें हैं; सरकार ने सीमा बढ़ाने का कोई फैसला घोषित नहीं किया है। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी पृष्ठभूमि आप हमारी 8वें वेतन आयोग वाली रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।
आप पर क्या असर पड़ेगा
- पैसा कब आएगा: OM में भुगतान की कोई तय तारीख नहीं दी गई है। रकम हर मंत्रालय/विभाग अपने बजट से देगा, इसलिए अलग-अलग दफ्तरों में तारीख अलग हो सकती है। आमतौर पर विभाग त्योहारों से पहले भुगतान की कोशिश करते हैं, लेकिन अपने दफ्तर के DDO या अकाउंट्स सेक्शन से ही सही जानकारी लें।
- पहले अपनी कैटेगरी जांचें: अगर आप रेलवे, डाक या किसी ऐसे विभाग में हैं जहां PLB स्कीम लागू है, तो आपको यह ₹6,908 वाला बोनस नहीं, बल्कि अपने विभाग का PLB मिलेगा। ग्रुप A अधिकारी और राजपत्रित ग्रुप B अधिकारी इस आदेश के दायरे में नहीं हैं।
- सेवा के महीने गिनें: अगर आपकी नियुक्ति 2025-26 के बीच हुई या आप लंबी बिना वेतन छुट्टी पर रहे, तो प्रो-राटा रकम का अंदाज़ा ऊपर की सूची से लगा सकते हैं।
- टैक्स: बोनस वेतन का हिस्सा माना जाता है, इसलिए यह आपकी करयोग्य आय में जुड़ेगा।
- DA पर अभी इंतज़ार: जुलाई 2026 से लागू होने वाली महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी पर, Livemint की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए DA की किसी “पक्की तारीख” वाले दावों पर तब तक भरोसा न करें जब तक कैबिनेट का फैसला या आदेश न आ जाए।
डाक विभाग में नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए हाल की दूसरी जानकारी: India Post GDS मेरिट लिस्ट 2026।
आगे क्या
अब हर मंत्रालय और विभाग इस OM के आधार पर अपने पात्र कर्मचारियों की सूची और भुगतान की प्रक्रिया शुरू करेगा। कर्मचारियों की नज़र अब दो बातों पर है: जुलाई 2026 की DA बढ़ोतरी का फैसला कब होता है, और 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में बोनस की ₹7,000 वाली सीमा पर कोई बदलाव होता है या नहीं। TrendFlash इन दोनों पर आने वाले हर आधिकारिक अपडेट पर नज़र रखेगा।
स्रोत: वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग का OM संख्या 7/24/2007-E-III(A), दिनांक 15.10.2026 (अनुलग्नक सहित); Livemint (15 और 17 अक्टूबर 2026); CNBC TV18 (16 अक्टूबर); The Economic Times (14 और 16 अक्टूबर); डाक विभाग का PLB आदेश, 16.10.2026 (Livemint, GovtStaff के ज़रिए); PMO/कैबिनेट का रेलवे PLB फैसला। प्रो-राटा और डाक PLB की रकम आदेशों में दिए फॉर्मूले से TrendFlash की गणना है।

